नित्यम प्रीतिकरा भवन्तु मम ते सर्वे-अनुकूला ग्रहाः||
आयी रंग अजूबा लेकर होली धूम मचाने को ।
चोली-दामन खूँ से लतपथ बचा न कुछ रंगवाने को ॥
: शाद