25 February 2014

भयात-भभोग

भयात-भभोग
नक्षत्र के प्रारम्भ से इष्ट समय की दूरी को भयात कहते हैं। संपूर्ण नक्षत्र के मान को भभोग कहते हैं। जैसे  इष्टकाल है ४२ घटी १२ पल। आज का वर्त्तमान नक्षत्र है ज्येष्ठा। जिसका ५६ घटी ४५ पल तक भोग है। जो पिछले दिन ५९ घटी ४३ पल से शुरू हुआ है। तो अहोरात्र होता है ६० घटी का इसमें ५९ घटी ४३ पल घटाएंगे, तब फल होगा ० घटी १७ पल। इसमें अपने इष्टकाल को जोड़ देंगे, तब फल होगा ४२ घटी २९ पल, यही भयात हुआ। भभोग के लिए जो ५६ घटी ४५ पल है उसको पिछले दिन के भोग से जोड़ देंगे तब फल होगा ५७ घटी ०२ पल।  यह हुई भयात-भभोग की कहानी।
भयात-भभोग तक की पढ़ाई सफलता पूर्वक पढ़ लेने के बाद दशा-महादशा सीखने की बारी आयी दशाएँ कई प्रकार की हैं। मगर परासर मत्त के अनुसार  विंशोत्तरी महादशा ही सर्वमान्य है। यह १२० वर्ष का माना गया है। जिसको नवग्रहों में इस प्रकार से बनता गया है :-  सूर्य ६ वर्ष; चन्द्र १०  वर्ष; मंगल ७ वर्ष; राहु १८ वर्ष; गुरु १६ वर्ष; शनि १९ वर्ष; बुध १७ वर्ष; केतु ७ वर्ष; शुक्र २० वर्ष २७ नक्षत्र हैं। सभी नक्षत्र के स्वामी ग्रहों के अनुसार जातक के ऊपर चलने वाली दशा- अन्तर्दशा की जानकारी ली जाती है। जो इस प्रकार है :- १. अश्विनी : केतु ; २. भरणी : शुक्र ; ३. कृत्तिका : सूर्य ; ४. रोहिणी : चन्द्र ; ५. मृगशिरा : मंगल ; ६. आर्द्रा : राहु ; ७. पुनर्वसु : गुरू ; ८. पुष्य : शनि ; ९. आश्लेषा : बुध ; १०. मघा : केतु ; ११. पूर्वाफाल्गुणी : शुक्र ; १२. उत्तराफाल्गुनी : सूर्य ; १३. हस्त : चन्द्र ; १४. चित्रा : मंगल ; १५. स्वाति : राहु ; १६. विशाखा : गुरू ; १७. अनुराधा : शनि ; १८. ज्येष्ठा  : बुध ; १९. मूल : केतु ; २०. पूर्वाषाढ़ा : शुक्र ; २१. उत्तराषाढ़ा : सूर्य ; २२. श्रवणा : चन्द्र ; २३. धनिष्ठा : मंगल ; २४. शतभिषा : राहु ; २५. पूर्वभाद्रपदा : गुरू ; २६. उत्तर-भाद्रपदा : शनि ; २७. रेवती : बुध।
हम ज्येष्ठा नक्षत्र के भयात-भभोग में चल रहे थे। भयात था ४२ घटी २९ पल एवं भभोग ५७ घटी ०२ पल। ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी बुध है। बुध की दशा १७ वर्ष की है। जिसमें कितना भुक्त्य है और कितना भोग्य ? यह पता करना है। अतः गणित बनेगा ५७ घटी ०२ पल में १७ वर्ष तो ४२ घटी २९ पल में कितना ? १७ गुणा भयात भागा भभोग  (१७ * ४२।२९  / ५७।०२  ). यहाँ भयात-भभोग को पलात्मक बना देने से गणित बनाने में सुविधा होगी। भयात है ४२।२९ तो पलात्मक बनाने के लिए १ घटी = ६० पल होता है अतः ४२  * ६०  = २५२० पल हुआ। इसमें २९ पल और जोड़ देंगे, तब पलात्मक फल हो जाएगा २५४९। यही पलात्मक भयात हुआ भभोग को भी इसी क्रिया से पलात्मक बनाना होगा। ५७ * ६०  + ०२  = ३४२० + ०२  = ३४२२ यह पलात्मक भभोग हुआ। सूत्र है महादशा वर्ष  * भयात  / भभोग   = १७  * २५४९  / ३४२२  = ४३३३३  / ३४२२  = तो फल भुक्त्य वर्ष कहलाएगा। फल होगा : १२ वर्ष ०७ माह २९ दिन। यह लिखाएगा इस तरह से : विंशोत्तरी मत्तानुसारेण बुध महादशा १७ वर्ष ; भुक्त्य वर्षादि : १२ वर्ष ०७ माह २९ दिन ; भोग्य वर्षादि : ०४ वर्ष ०४ माह ०१ दिन। 
पंचांगों में महादशा के अन्तर्गत अन्तर्दशा की सारिणी दी रहती है। ऐसे अन्तर्दशा है क्या ? जिस तरह से महादशा का क्रम है उसी तरह से अन्तर्दशा का क्रम है। अन्तर्दशा बनाने का गणित है : महादशा वर्ष  * अन्तर्दशा  / १२०  = १७  * १७  / १२०  = ०२ वर्ष ०४ माह २७ दिन। यह बुध की महादशा में बुध की अन्तर्दशा हुई। इसी तरह केतु की अन्तर्दशा : १७  * ७ / १२०  = ० वर्ष ११ माह २७ दिन।
नक्षत्र के चार चरण होते हैं। जैसे ऊपर वर्णित ज्येष्ठा नक्षत्र के भभोग का मान ५७।०२ घट्यादि है तो पहला चरण इसका पहला चतुर्थांश होगा। ५७।०२  / ४  = ३४२२  / ४  = ८५५.५  = १४।१५|३०  का एक चरण हुआ। दूसरा चरण हुआ २८।३१। तीसरा चरण ४२।४६।३० पर है। हमारा भयात ४२।२९ घट्यादि है तो हमारे जातक का जन्म ज्येष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण में है। यह समझना चाहिए।  


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